Tuesday, May 15, 2018
Tuesday, May 8, 2018
Tuesday, April 3, 2018
चाँद खफ़ा खफ़ा रहता है मुझसे
चाँद खफ़ा खफ़ा रहता है मुझसे
उसका गुरूर जो तुमने तोडा है।
एक-एक करके तारे भी रूठ गए
हमने नाता जो तुमसे जोड़ा है।
...अनिल कुमार 'अलीन'.....
Saturday, August 19, 2017
खिड़कियाँ आज भी खुलती हैं
खिड़कियाँ आज भी खुलती हैं,
पर वो पहले वाली बात कहाँ?
वो एक हशीन रात थी,
अब मेरे नशीब में वैसी रात कहाँ ?
यूं तो मिलने को रोज मिलते हैं,
तबियत मिले वो मुलाकात कहाँ ?
फ़र्क दिन-रात का हुआ मुश्किल है,
सुकून से सो सकू वो रात कहाँ ?
क्योंकर सुनेंगे किस्से दादी-नानी के,
आज के बच्चों में ज़ज्बात कहाँ ?
मौजूदा दौड़ में सभी दुल्हें हैं,
साथ चल सके अब वो बारात कहाँ ?
...... ....... सूफ़ी ध्यान श्री
पर वो पहले वाली बात कहाँ?
वो एक हशीन रात थी,
अब मेरे नशीब में वैसी रात कहाँ ?
यूं तो मिलने को रोज मिलते हैं,
तबियत मिले वो मुलाकात कहाँ ?
फ़र्क दिन-रात का हुआ मुश्किल है,
सुकून से सो सकू वो रात कहाँ ?
क्योंकर सुनेंगे किस्से दादी-नानी के,
आज के बच्चों में ज़ज्बात कहाँ ?
मौजूदा दौड़ में सभी दुल्हें हैं,
साथ चल सके अब वो बारात कहाँ ?
...... ....... सूफ़ी ध्यान श्री
Sunday, June 5, 2016
Friday, September 11, 2015
हकीकत न दिखाओ मर जाऊंगा।
यकीनन ख़ाक सहराओं की तूने उड़ा रक्खी होगी,
मेरी तन्हाई ऐसे किसी तिनके की मोहताज़ नहीं।
---सूफी ध्यान श्री
मुद्दतोँ बाद ख्वाब आँखों से ओझल हुए हैं यारों
ज़माने की हकीकत न दिखाओ मर जाऊंगा।
-----सूफ़ी ध्यान श्री
बड़ी मुश्किल से नींद से जागा हूँ यारों
ख्वाब न दिखाओ फिर से सो जाऊँगा।
.........सूफ़ी ध्यान श्री
भला क्योंकर न हो,
उन्हें उजालों से परहेज
जो रात के साये में जीते हैं।
कुछ अजीब हैं शख्स वे
जो गिरवी रखकर इमान,...
मर्यादा के मुखौटे में जीते हैं।
----सूफ़ी ध्यान श्री
फ़साने ही फ़साने हो जहाँ हरेक फ़साने पे।
फिर मुश्किल है जुगल बंदी वहाँ जुबानों पे।। ----सूफी ध्यान
खो जाए वजूद फिर वो अपना क्या?
जुड़ा रहे खुदी से फिर उसका क्या?
अपने वजूद की दुनिया बस इतनी है,
पानी पर पानी लिखनी जितनी है।
----सूफी ध्यान श्री
क्योंकर ख्वाब आये पलकों की दहलीज पर,
जब आँखों की नींद तक चुरा गया है कोई।
हर वक़्त ढूढ़ता रहता हूँ खुद को, खोकर उसमे
जब से पराया कह कर अपना बना गया है कोई।।
-----सूफी ध्यान श्री
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